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सफलता का शार्टकट होता है

  ज्यादातर लोग कहते हैं कि सफलता का शॉर्टकट नहीं होता है और बिना मेहनत कुछ हांसिल नहीं किया जा सकता है पर मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि सफलता का शॉर्टकट सफल व्यक्ति का पिता होता है और लोग इनका जमकर उपयोग कर सफल हो रहे हैं।      परीक्षाओं के इंटरव्यू में जान पहिचान, रसूख और पैसा का इस्तेमाल कर सफलता हांसिल करना शॉर्टकट है और एक सफल सामाजिक व्यक्ति अपने पुत्र/पुत्री के लिए  इसका जमकर इस्तेमाल करता है।  न्यायालय में अधिकतर सफल वकील  पिता के उत्तरधिकारी के रूप में उनके पुत्रों/पुत्रियों  को उनके चैम्बर में आप देख सकते हैं।  सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट के पुत्रों को आप उनका व्यवसाय सम्हालते देख सकते हैं क्लर्क और चपरासी जैसे पदों को सिफारिश या पैसे की दम पर हांसिल करके शानदार नौकरी करते हजारों लोगों को आप समाज में अपने आस पास देख सकते हैं और वह शान से अपनी सफलता की कहानी भी बताते मिल जायेंगे कि किस तरह उन्होंने सेटिंग करके और पैसा देकर पद पर कब्ज़ा किया था।  आई आई टी, एन आई टी जैसे संस्थानों को छोड़ दें तो ज्यादतर निजी विद्यालयों में पढ़ने बाले छात्...

मन तो है वामपंथी

 * विचारों से हम सब वामपंथी होते हैं पर माता पिता और बुजुर्ग  हमें सही रास्ते के लिए प्रेरित करते हैं*  वामपंथी विचारधारा को समाज अपने लिए उचित नहीं मानता है क्योंकि यह सामजिक मान्यताओं और व्यवस्थाओं पर प्रश्न खड़े करके लोगों को उनसे दूर ले जाती है और बंधन रहित भोग विलासी जीवन को प्रेरित करती है।  वस्तुतः मनुष्य एक प्राणी के रूप में प्राकृतिक रूप से किसी भी तरह के सामाजिक बंधनों में बंधना पसंद नहीं करता है इसलिये उसे जब भी बंधन युक्त कोई भी काम करने को कहा जाता है तो उसका मन प्राकृतिक रूप से विद्रोही हो उठता है पर माता पिता, गुरु, समाज उसे निश्चित जीवन शैली और व्यवस्थाओं में बाँधने की कोशिश में लग जाते हैं स्कूली शिक्षा, घरेलू कार्य, जीवन यापन के लिए किसी की नौकरी, बच्चों को पढ़ाने /पालने की जिम्मेदारी, बुजुर्ग माता पिता की जिम्मेदारी आदि कार्य स्वेच्छा से लेने बाले इंसान बहुत कम होते हैं पर समय के साथ मज़बूरी में उन्हें करने होते हैं लेकिन सत्य तो यही है कि बच्चे, युवा, स्त्री-पुरुष  सभी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते हुए आनंदमय जीवन जीना चाहते हैं  किसी...

मन का कचरा साफ कीजिये

 आप अपने घर में क्या रखना पसंद करते हैं अच्छी सुन्दर उपयोगी बस्तुएँ या कबाड़? निश्चित ही आप कबाड़ को या तो फेंक देते हैं या कबाड़ी को बेंच देते हैं अब आप बताएं कि आप अपने शरीर के स्टोर (दिमाग़ ) में क्या रखना पसंद करते हैं? अच्छी यादें या  ईर्ष्या द्वेष नफ़रत घृणा निश्चित ही मानवीय स्वभाव के तहत हम उन चीज़ों और विचारों को ज्यादा याद रखते हैं जो हमें पसंद नहीं आते हैं पत्नी नें पति के लिए क्या नहीं किया यह उसे ज्यादा याद रहता है जबकि पत्नी अपना पूरा समय एक घर को घर बनाने में लगा देती है। पति नें पत्नी के लिए क्या नहीं किया यह उसे जीवन भर याद रहता है जबकि पति अपनी पूरी मेहनत घर को आर्थिक और भौतिक रूप से मजबूत करने में लगता है। माता पिता नें बच्चों को कब डांटा, कौन सी फरमाइश पूरी नहीं की कौन सी सुविधा नहीं दी यह उन्हें याद रहता हैं जबकि उन्होंने जीवन में उसे सब कुछ करके पाला पोसा होता है। समाज के लोगों के लिए भी लगभग यही मनोदशा हम सबकी है लोगों नें कब अच्छा किया आपके साथ उसकी जगह कब बुरा किया या बुरा कहा बस यही याद रख पाते हैं। धीरे धीरे हमारे मन में इतना नकारात्मक कचरा इकठ्ठा हो जाता ...

आपकी सोच का दर्पण है सोशल मीडिया

  क्या आपके मोबाइल में वहीं पोस्ट दिखती होंगी जो मेरे में दिखती हैं? बहुत समय तक मुझे लगता था कि सोशल मीडिया पर जो भी परोसा जा रहा है वह सभी को दिखता होगा😀  फिर पता चला कि फेसबुक पर आपको केवल आपके बनाये दोस्तों की पोस्ट दिखती हैं यानि जिसके जैसे दोस्त उसकी वैसी पोस्ट 😀 यानि लम्बे समय तक आपने वहीं देखा जो आपके दोस्तों नें पोस्ट किया  उसके बाद सोशल मीडिया नें इसे आपके इंटरेस्ट से कनेक्ट करने का फ़िल्टर लगा दिया यानि आप जिस वीडिओ या पोस्ट पर ज्यादा समय देते हैं सोशल मीडिया जान जाता हैं कि व्यक्ति का इंटरेस्ट इसमें है और वह उसी तरह के वीडिओ की लाइन लगा देता हैं  अब धार्मिक बालों को सोशल मीडिया पर महात्मा दिख रहे हैं और और नाचने बालों को नाच के वीडिओ, खेल बालों को खेल के विडिओ, अश्लील सोच बालों को अश्लीलता के वीडिओ, अच्छी सोच बालों को अच्छे पढ़ाई बालों को कोचिंग क्लास के वीडिओ, व्यापार बालों को व्यापार के   फिर सोशल मीडिया लोगों को विगाड़ने का जिम्मेदार कैसे? जिनकी रही भावना जैसी तीन देखी... आपको समाज में वहीं दिखता है जो आप देखना चाहता हैं वहीं मिलता हैं जो आप खोजना ...

जोखिम भरे हैं सफलता के शार्टकट

  3000 करोड़ की बायजू  कंपनी की नेट वर्थ शून्य हो गयी दुनियाँ भर में रोल मॉडल बना व्यक्ति आज असफल होकर घर बैठा है पर एक गंभीर  मुद्दा पूरे समाज को चर्चा के लिए मिल गया है और अब वह लोग भी निश्चित रूप से चिंतित होंगे जिन्होंने बायजू से प्रेरणा लेकर उस रास्ते पर चलने का निर्णय लिया था।  हमरे समाज की मनोदशा ही कुछ ऐसी हैं कि बिना कुछ जाने समझे किसी भी रोल मॉडल के कार्यों को बड़े स्तर तक कॉपी करना शुरु कर देते हैं यहाँ तक कि बेईमान और  अपराधियों तक के कार्यों को अपनाकर धन दौलत कमाने से परहेज नहीं करते। पर क्या वह लोग अपने रोल मॉडल की तरह भविष्य असफलता और दंड भुगतने को तैयार होंगे?   वास्तव में वर्तमान समाज बहुत  दूरदर्शी नहीं हैं वह तात्कालिक सफल परिणामों को बड़ी जल्दी फॉलो कर लेता है विशेषकर युवा बहुत जल्दी ही सफल लोगों को कॉपी कर लेते हैं। भारत की सबसे अधिक बौद्धिक लोग आई आई टी में अपना ग्रेजुएशन पूरा करते हैं पर पिछले एक दशक में इन युवाओं में स्टार्टअप शुरु कर अरबपति, ख़रबपति बनने का जूनून चढ़ा हैं। किसी स्टार्टअप के लिए बहुत अधिक कौशल, व्यावहारिक और सामाजिक ...

विज्ञान और अध्यात्म

  विज्ञान और अध्यात्म में बहुत गहरा सम्बन्ध है मनुष्य की समस्त जैविक शक्तियों को संचालित करने के लिए एनर्जी की जरुरत होती है जो भोजन से मिलती है और यही एनर्जी शरीर के विभिन्न अंगों के कुशल संचालन को जिम्मेदार होती है विज्ञान भी मानता है कि एनर्जी का प्रवंधन किसी भी कार्य को अद्वितीय रूप से करवाने में सक्षम है और अध्यात्म भी कहता है कि मन को एकाग्र करके शरीर के अंगों से अद्वितीय कार्य लिया जा सकता है अगर हम मन को एकाग्र करने को विज्ञान की भाषा में कहें तो यह ऊर्जा को एक विशिष्ट कार्य में प्रयोग करना ही है। शरीर स्वयं तय करता है कि किस अंग के संचालन के लिए कितनी ऊर्जा चाहिए।   वास्तव में इस श्रष्टि का आधार ऊर्जा है जो हर जीव जंतु और पदार्थ में किसी न किसी रूप में पायी जाती है यहाँ तक कि किसी पत्थर में भी उसकी स्थिति के कारण स्थितिज ऊर्जा होती है वहीं जो अनाज सूखा हमें मरा हुआ प्रतीत होता है उसकी ऊर्जा ही हमारे शरीर में जाकर हमें संचालित करती है। यही ऊर्जा जब किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ में होती है तो परमाणु विस्फोट को जन्म देती है तो क्या इस ऊर्जा के रूप या उपयोग को नियंत्रित ...

प्रतियोगी छात्रों को आत्महत्या से बचाएं

  कोटा में हर वर्ष कई बच्चे परीक्षा में असफलता के दबाब में आत्महत्या कर लेते हैं  तो समाधान निकाला गया कि कमरों में लगे  पंखो को जाली से कवर कर दो ताकि वह पंखे में रस्सी बांधकर न लटक सकें या पंखो के लटकाने वाले हुक को स्प्रिंग का बना दो ताकि वह जब लटकें तो स्प्रिंग लम्बी होकर जमीन तक आ जाये।   क्या वास्तव में यह आत्महत्या रोकने का कारगर उपाय है? जो अत्यधिक डिप्रेशन में है और जो मरने का मन बना चुका है क्या वह मरने का कोई और रास्ता नहीं खोज लेगा? भगवान न करें कि किसी माता पिता का बच्चा परीक्षा में असफलता या असफलता के डर से आत्महत्या करे पर अपनी सफलता के लिए जीतोड़ मेहनत करने बाले जूनूनी और संवेदनशील बच्चों में से कई के मन में इस तरह के भयावह विचार कभी कभी आ ही जाते हैं और जिन्हें अपने माता पिता की डांट या दोस्तों के कमेंट को झेलने का साहस नहीं होता हैं वह खुद पर नियंत्रण खोकर कई बार आत्महत्या जैसे निर्णय भी ले लेते हैं।    वास्तव में हम समस्याओं का मूल कारण खोजना ही नहीं चाहते है हम तो तात्कालिक कारणों और उपायों पर समय और पैसा बर्बाद करते हैं।  हम नहीं जा...