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सफलता का शार्टकट होता है

 


ज्यादातर लोग कहते हैं कि सफलता का शॉर्टकट नहीं होता है और बिना मेहनत कुछ हांसिल नहीं किया जा सकता है पर मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि सफलता का शॉर्टकट सफल व्यक्ति का पिता होता है और लोग इनका जमकर उपयोग कर सफल हो रहे हैं।
     परीक्षाओं के इंटरव्यू में जान पहिचान, रसूख और पैसा का इस्तेमाल कर सफलता हांसिल करना शॉर्टकट है और एक सफल सामाजिक व्यक्ति अपने पुत्र/पुत्री के लिए  इसका जमकर इस्तेमाल करता है। 
न्यायालय में अधिकतर सफल वकील  पिता के उत्तरधिकारी के रूप में उनके पुत्रों/पुत्रियों  को उनके चैम्बर में आप देख सकते हैं।
 सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट के पुत्रों को आप उनका व्यवसाय सम्हालते देख सकते हैं क्लर्क और चपरासी जैसे पदों को सिफारिश या पैसे की दम पर हांसिल करके शानदार नौकरी करते हजारों लोगों को आप समाज में अपने आस पास देख सकते हैं और वह शान से अपनी सफलता की कहानी भी बताते मिल जायेंगे कि किस तरह उन्होंने सेटिंग करके और पैसा देकर पद पर कब्ज़ा किया था। 
आई आई टी, एन आई टी जैसे संस्थानों को छोड़ दें तो ज्यादतर निजी विद्यालयों में पढ़ने बाले छात्र  अपने पिता की संपत्ति की दम पर इंजीनियर बने होते हैं और इसमें उनकी मेहनत का योगदान काफ़ी कम होता है इसमें से कई अपने पिता के बाद राजकीय ठेकदार बनकर करोड़ों कमाते मिल जायेंगे। 
 सरकारी मेडिकल कॉलेज को छोड़कर निजी मेडिकल कॉलेज से बने डॉक्टर बड़े अस्पतालों को खोलकर अपने पिता द्वारा अर्जित संपत्ति के द्वारा ही सफल इंसान बनते हैं जिनका प्रतिशत सरकारी से काफ़ी अधिक होता है 
ज्यादातर प्रतिष्ठित पुरस्कार पाने बाले लोग ढेर सारे शार्टकट अपनाते देखे जा सकते हैं और बड़े मंचों से अपनी कूटरचित सफलता की कहानी युवाओं को बताते मिल जायेंगे।
 देश में ढेर सारे राजनेताओं के पुत्र बिना किसी योग्यता के अपने पिता द्वारा बनाये गए राजनीतिक रसूख की दम पर चुनाव जीतते देखे जा सकते हैं। 
  बिज़नेस में करोड़पतियों के पुत्र बिना किसी योग्यता के अपने पिता के करोड़ों के कारोबार के उत्तरधिकारी बनते देखे जा सकते हैं 
  पैसे बालों के पुत्र/पुत्रियां  बिना किसी योग्यता के अपने पिता द्वारा स्थापित महाविद्यालयों के प्रवन्ध निदेशक बनते देखे जा सकते हैं जबकि ज्यादातर नें अपनी अहर्ता केवल पैसे की दम पर खरीदी डिग्री से हांसिल की होती है।
   इसलिये किसी का पिता उसकी सफलता का शार्टकट होता है और असफल हुए ढेर सारे बच्चों को इस बात का मलाल होता है कि काश उनके पिता भी नामी गिरामी रईस होते तो उनको पद पैसा और प्रतिष्ठा की दम पर कहीं सेट करवा देते या बिज़नेस करवा देते। 

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