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बच्चों को सिखाएं असफलता का मैनेजमेंट

  विगत दिनों उत्तर प्रदेश में नीट की तैयारी कर रहे एक 17 वर्षीय छात्र ने आत्महत्या कर ली थी ऐसी घटना कोई पहली बार नहीं हुई है कोटा में तो हर वर्ष प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सैकड़ो छात्र परीक्षा के तनाव दबाब और अवसाद से ग्रसित होकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। केवल प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो रहे किशोर ही नहीं बल्कि शादीशुदा नवयुवा भी अक्सर जीवन की छोटी मोटी चुनौतियों से घबराकर आत्महत्या जैसा कदम उठाकर अपना जीवन दांव पर लगा लेते है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है इस पर न तो कोई चर्चा होती है और न ही कोई सेमिनार। जिस परिवार का किशोर या युवा जाता है उनके सामने दुःखों को बर्दाश्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है।        शहरी क्षेत्रों में आज के बच्चे अपने लक्ष्यों के प्रति बड़े क्रेजी होते हैं छोटे छोटे बच्चे अपने ड्रेसिंग सेंस और लाइफस्टाइल को लेकर काफी जागरूक हैं। 6 साल के बच्चों की भी पसंद और ना पसंद होती है क्योंकि हमने बचपन से ही उन्हें सलीके से पहनने ओढ़ने की सलाह दी है। आजकल बच्चों के शैक्षिक लक्ष्यों का निर्धारण उनके माता पिता करते हैं ऐसे में व...

आसानी से बनें समाज के सफल इंसान

    अगर आप भी समाज के सफल इंसान बनना चाहते हैं तो अपनाए ये स्टेप्स और लहरायें अपनी प्रसिद्धि का परचम।  समाज के प्रसिद्ध लोगों के गोपनीय साक्षात्कार और शोध पर आधारित सबसे सटीक कार्ययोजना  1. सबसे पहले समाज मे प्रसिद्ध और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ( सत्ता पक्ष) के लोगों तथा अधिकारियों की एक लिस्ट बनाये। 2. उनके आगामी कार्यक्रमो की जानकारी जुटाएं और अपने किसी परिचित के माध्यम से उनका माल्यार्पण का अवसर तलाशें। माल्यार्पण की फ़ोटो जरूर निकलवायें और फेसबुक पर साझा कर दें। 3. कार्यक्रम के बाद उनके घर मुलाकात की कार्ययोजना बनाये और मुलाकात करें भले ही आपको चार छः बार निराश होकर लौटना पड़े पर हिम्मत न हारें जब मुलाकात हो तो आप उनके व्यक्तितव की जमकर तारीफ करें। इसकी फ़ोटो खिंचवाने के लिए एक साथी जरूर लेकर जाएं और तुरंत फेसबुक पर साझा करें।  4. मुलाकात का सिलसिला लगातार बनाये रखें केवल चेहरा दिखाते रहें।  भले ही दो चार बार दुत्कार दिये जायें पर हिम्मत न हारें लगातार मिलते रहें जब दुत्कार और उपेक्षा बंद हो जाये और आपसे आपका नाम लेकर बात शुरू हो जाये और  पूंछा जाए ...

हिन्दू धर्म मे अंतिम संस्कार के वैज्ञानिक और सामाजिक क्रिया कर्म

  हिन्दू धर्म में कोई भी कर्म गैर वैज्ञानिक एवं गैर व्यवहारिक नहीं है क्योंकि हिन्दू धर्म के साथ एक श्रेष्ठ जीवन पद्यति है। हिंदुओ में व्यक्ति की मृत्यु से जुड़े संस्कारो का बड़ा सामाजिक महत्व है।  1. नदियों के किनारे दाह संस्कार हिंदुओ में पवित्र नदियों के किनारे दाह संस्कार करने के पीछे भावात्मक और धार्मिक मान्यता तो है ही पर यह वैज्ञानिक भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार शरीर के जलने के बाद जो राख बचती है वह एक सर्वश्रेष्ठ खाद है जिसे बोनमील खाद कहते हैं। जिसे दाह संस्कार के बाद पवित्र नदियों में प्रवाहित करने का रिवाज है जिससे यह नदी के जल के साथ खेतों तक पहुचकर खेत को उपजाऊ बनाती है। आप सभी जानते हैं कि गंगा नदी भारत मे सबसे अधिक दूरी तय करती है साथ ही सबसे अधिक पवित्र भी मानी जाती है इसलिए गंगा नदी के किनारे अंतिम संस्कार करने की प्रथा हमारे धर्म में चलन में है। अंतिम संस्कार के बाद बची राख को उसी नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है जिसमे कैल्शियम सल्फर जैसें मिनरल होते हैं। इस रिवाज के चलते यह खाद प्रचुर मात्रा में खेतों तक पहुंच जाती है। जिन स्थानों के आसपास नदियां नहीं होती थी ...

छात्रा ने खुद को कुछ याद दिलाने के लिए किया ऐसा उपाय सब कर उठे वाह वाह

 कक्षा 12 में पढ़ने बाली छात्र ने खुद को अटेंशन में रखने के लिए कुछ ऐसा उपाय किया कि लोग वाह वाह कर उठे।     आज हम बात कर रहे हैं कक्षा 12 में पढ़ने बाली के छात्रा की। यह छात्रा आई आई टी की तैयारी कर रही है जिसके लिए उसे कई घंटे कोचिंग सेंटर और सेल्फ स्टडी में देने पड़ते थे। स्कूल और कोचिंग में वह फिजिक्स केमिस्ट्री और मैथ की 2-2 घंटे क्लास के बाद उसकी तैयारी में 2-2 घंटे देने पड़ते थे ऐसे में वह कक्षा 12 बोर्ड के अन्य विषय कंप्यूटर और अंग्रेजी को पढ़ना ही भूल जाती थी। बाद में उसने कंप्यूटर के लिए स्कूल की ऑनलाइन क्लास को ही आधार बनाया पर अंग्रेजी फिर भी छूट रही थी  इसलिए उसने खुद को अटेंशन रखने के लिए एक प्रयोग किया।  एक दिन उसके पिता जब कमरे में गए तो उसकी टेबल पर लगे कैलेंडर पर एक स्लिप लगी हुई थी जिसको पढ़कर वह मुस्कराए बिना नहीं रह पाए। उस पर लिखा था कि "इंग्लिश भी पढ़ लिया करो बेटा" जब उन्होंने इसके बारे में पूंछा तो उसने बताया कि मैं यह भूल ही जाती हूँ कि मेरे पास इंग्लिश विषय भी है इसलिए अब जब भी मेरी निगाह सामने जाती है तो मुझे याद आ जाती है कि मुझे इंग्ल...