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पुरुष क्यों बनना चाहती स्त्री?

  कुछ दिन पहले टेलीविजिन पर एक प्रचार बड़े जोर शोर से आता था जिसमे स्कूटी चलाती लड़कियाँ कहती थी "व्हाई शुड बॉयज हैव आल द फन" इसे देखकर अन्य लड़कियों में अपने माता पिता से स्कूटी पाकर पुरुषों की तरह मस्ती करने का सपना हिलोर मारने लगता था। वास्तव में यह टैग लाइन अप्रत्यक्ष रूप से यह बताती थी कि सभी प्रकार की मस्ती करने का अधिकार सिर्फ लड़कों को ही है और यह लड़कियों को भी मिलना चाहिए।     यहाँ प्रश्न यह उठता है कि किस प्रकार की मस्ती? सड़कों पर तेज़ रफ़्तार ड्राइविंग करने की या लड़को की तरह बाइक में पेट्रोल भरवाकर दिन भर आवारागर्दी करते हुए इसे उसे छेड़ते रहने की?  शराब पी कर उत्पात मचाने की या क्लब रेस्टॉरेंट में पार्टियाँ करते हुए सिगरेट फूंकने की? वास्तव में लड़कियों और महिलाओं को अक्सर इस बात की टीस उठती है कि उन्हें पुरुषों की तरह मस्ती करने की आजादी नहीं मिली। शायद इसी कल्पना का परिणाम है कि कॉलेज स्तर पर अब लड़कियाँ माता पिता के टोका टाकी भरे बंधन मुक्त होकर लड़कों के जैसा जीवन जीने को आतुर दिखती हैं।        आप किसी भी बड़े कॉलेज में  ग्रेजुएशन क...