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जुलाई, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुफ्तखोरी की आदत

हमारा देश मुफ्तखोरो का देश है क्यूंकि कई सौ सालों की गुलामी के बाद मुफ्तखोरी हमें आजादी के इनाम में मिली है ।पहले हम विदेशी शासकों के रहमोकरम पर जिन्दा थे अब सरकारी योजनाओं के रहमोकरम पर अपना पेट पाल रहे है और देश की आधे से अधिक आबादी मुफ्तखोरी के आनंद में मस्त है।बच्चे के पैदा होते ही उसकी माँ को सरकारी सहायता उपलब्ध करवाकर ये बता दिया जाता है कि जीवन की हर मुश्किल में भारत सरकार उसके साथ है।बच्चा 3साल का होते ही महिला बाल विकास मंत्रालय पंजीरी खिला खिला कर बच्चे को स्वस्थ्य बनाने में अपनी जिम्मेदारी को निभाकर बच्चे के माँ बाप को फील गुड करा देता है इसके बाद बच्चे को गोद लेने की जिम्मेदारी है प्राथमिक शिक्षा विभाग की ।बिना फीस भरे मुफ्त की किताबों और स्कालरशिप तथा मध्यान्ह  भोजन के सहारे बच्चा कब कक्षा 8 पास कर जाता है ये माँ बाप को पता ही नहीं चलता है ।माध्यमिक शिक्षा विभाग भी गरीब ग्रामीण बच्चों को उपकृत कर 12वी पास कराकर अपने कर्तव्य पूरे कर देता है अब बारी आती है वेरोजगारी भत्ते की जिसके सहारे 2-3 साल और आराम से कट जाते है तथा किशोर छात्र के छोटे मोटे शौक भी पूरे हो जाते है औ...