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अगस्त, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गलत उच्चारण से बचिए

 हिन्दू धर्म मे एक बहुत बड़ा वर्ग "जै श्री कृष्णा" कहता मिल जाएगा बिना यह जाने कि "कृष्णा" का अर्थ क्या है? कृष्णा वास्तव में राजा द्रुपद की पुत्री द्रोपदी का मूल नाम है। जिन्हें कृष्ण अपनी सखी मानते थे ,😊  भारत मे किसी भी "अ" की जगह "आ" का उच्चारण करना एक फैशन सा बनता जा रहा है। जैसे धर्म dhram हो गया dharma कर्म karmहो गया karma  रामायण  ramayan हो गयी ramayana हिमालय himalay हो गया himalaya राम ram हो गए rama  कृष्ण krishn हो गए krishna      यह तीन कारण से हुआ  पहला इसलिए कि ज्यादातर छात्र अंग्रेजी के शिकार हैं। "अ" की मात्रा व्यंजन के साथ जब लगती है तब दिखती नहीं पर उच्चारित होती है और अधिकांश बच्चे इसे "आ" के रूप में उच्चारित करते हैं जैसे बच्चों को जब ओलम सिखाते हैं तो वह "क" को जोर से "का" ही बोलेंगे "ख"को "खा"। अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में तो वैसे भी हिंदी विषय पर ज्यादा गौर नहीं होता है और हिंदी माध्यम के स्कूलों में भी इस उच्चारण पर कभी टोका नहीं जाता।  दूसरा इस्कॉन के अंग्र...

धार्मिक शिक्षा ज्यादा जरूरी

  एक गंभीर प्रश्न लोग अक्सर करते हैं कि मंदिरों की जगह बच्चों को स्कूल जाना चाहिए इससे व्यक्ति की प्रगति होगी देश की प्रगति होगी। प्रथम दृष्टया यह बात सत्य ही प्रतीत होती है और इसी अधूरे सत्य के आधार पर पिछले 2-3 दशकों ने लोगों ने धर्म से ऊपर शिक्षा को महत्व भी दिया है। अब 2-3 दशक बाद इस अधूरे सत्य के वास्तविक परिणाम आने शुरू हो चुके हैं व्यक्ति तथाकथित शिक्षा लेकर खूब धन दौलत कमा रहा है, भोग विलास और ऐश्वर्य को भोग रहा है। जिन्होंने 2 दशक पूर्व अपने बच्चों को धर्म से दूर कर रोजगार परक शिक्षा के लिए प्रेरित किया था अब वह एकाकी सामाजिक जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं बच्चे अब मात्र पित्र धर्म से विमुख हो रहे हैं क्योंकि बच्चों को धार्मिक शिक्षा से दूर रखा गया था। जिन बच्चों ने शिक्षा में अच्छे अंक नहीं हाँसिल किये थे वह भी एन केन प्रकारेण साम, दाम, दंड, भेद, चोरी, वेइमानी, पिता की संपत्ति आदि बेंचकर भी भोग विलास और ऐश्वर्य को भोग लेना चाह रहे हैं। वास्तव में स्कूली शिक्षा व्यक्ति को किसी कार्य आदि को करने की योग्यता या अहर्ता प्रदान करती है पर धार्मिक शिक्षा आपको परिवार उपयोगी, समाजउप...