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गलत उच्चारण से बचिए

 हिन्दू धर्म मे एक बहुत बड़ा वर्ग "जै श्री कृष्णा" कहता मिल जाएगा बिना यह जाने कि "कृष्णा" का अर्थ क्या है? कृष्णा वास्तव में राजा द्रुपद की पुत्री द्रोपदी का मूल नाम है। जिन्हें कृष्ण अपनी सखी मानते थे ,😊

 भारत मे किसी भी "अ" की जगह "आ" का उच्चारण करना एक फैशन सा बनता जा रहा है।

जैसे धर्म dhram हो गया dharma

कर्म karmहो गया karma 

रामायण  ramayan हो गयी ramayana

हिमालय himalay हो गया himalaya

राम ram हो गए rama 

कृष्ण krishn हो गए krishna

     यह तीन कारण से हुआ 

पहला इसलिए कि ज्यादातर छात्र अंग्रेजी के शिकार हैं। "अ" की मात्रा व्यंजन के साथ जब लगती है तब दिखती नहीं पर उच्चारित होती है और अधिकांश बच्चे इसे "आ" के रूप में उच्चारित करते हैं जैसे बच्चों को जब ओलम सिखाते हैं तो वह "क" को जोर से "का" ही बोलेंगे "ख"को "खा"। अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में तो वैसे भी हिंदी विषय पर ज्यादा गौर नहीं होता है और हिंदी माध्यम के स्कूलों में भी इस उच्चारण पर कभी टोका नहीं जाता। 

दूसरा इस्कॉन के अंग्रेजों और दक्षिण भारतीय की हिंदी कमजोर होने से उनके द्वारा सभी धार्मिक नामों को "आ" की मात्रा के साथ उच्चारित करने के कारण।  

तीसरा अंग्रेजी भाषा मे बोलता व्यक्ति इस तरह के नाम के आगे आ की मात्रा उच्चारित करने से ऐसा लगने लगता है कि यह हाइली एडुकेटेड पर्सन है।😀

इसलिए कृपया अपने बच्चों को इस तरह के गलत उच्चारण के लिए टोकते रहें अन्यथा कालांतर में धर्म से जुड़े सभी नाम अपना मूल स्वरूप और अर्थ खो देंगे।

जय श्री कृष्ण

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