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मोबाइल है तो निगरानी में हो


दो घटनाये देखिये 
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नें ai की मदद से लाखों टैक्स चोरी करने बालों को नोटिस भेज दिया 
कर्नाटक में इनकम टैक्स नें छोटे व्यापरियों को लाखों के नोटिस थमाए तो दुकानदारों क्यू आर कोड दुकान से हटाए।
 ये तो एक ट्रेलर मात्र है अभी पिक्चर बाक़ी है 
2007 के लगभग दलजीत चौधरी जी  इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बने थे उसी समय  नया नया मोबाइल आया था और चम्बल के डकैतो और उनके मुखबिरों के लिए अच्छी सुविधा बन गई । तत्कालीन एस टी एफ और एस ओ जी से जुड़े लोग बताते हैं कि एसएसपी साहब नें इसी टेक्नोलॉजी को डकैत विहीन इटावा के लिए हथियार बना लिया और मोबाइल तकनीक के सहारे ही सभी डकैत मुखबिरी की दम पर निपटा दिए गए।
 समय बदला और मल्टीमीडिया एंड्राइड फोन आये और अम्बानी नें सस्ते रिचार्ज और इंटरनेट से लोगों की दुनियाँ बदल दी। सोशल मीडिया पर जुड़ने की ललक नें हर हाँथ में मल्टीमीडिया मोबाइल आ गया अब बारी थी सरकार द्वारा इसी तकनीक को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की। 
बैंक नें अपने कस्टमर को एस एम एस सुविधा के लिए नंबर माँगा, अधिक लेनदेन के लिए पेन कार्ड बनबाने को कहा फिर पेन कार्ड के जरिये इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नें आपका मोबाइल नें नंबर लिया, फिर सरकार नें पहिचान पत्र में आधार अनिवार्यता करके आपका मोबाइल नंबर लिया,  फिर यही आपके भू अभिलेखों से जुड़ा, आपके ऑनलाइन खरीद से जुड़ा, आपके यू पी आई पेमेंट से जुड़ा। अब आपका यह नंबर सही है या नहीं इसके लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट नें बायोमेट्रिक के बाय सी करवाकर उसकी पुष्टि कर ली। अब यही  मोबाइल नंबर आपकी गूगल  मेल आई डी से जुड़ा जो  आपके मोबाइल को चालू रखने के लिए अनिवार्य है और और आपकी  मेल आपके पेन कार्ड और इनकम टैक्स पोर्टल से जुड़ी है।


 अब शुरु हुआ असल खेल, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नें देखा कि किसी पेन कार्ड धारक नें कितना टैक्स दाखिल किया उसने ai से इसका डाटा मैच करने को कहा ai में मोबाइल नंबर और एड्रेस के जरिये उन सभी श्रोतों की जाँच की जिनसे उस व्यक्ति के खातों में रुपया जमा हुआ या निकासी हुई और पाया कि लोगों नें टैक्स में अपनी कमाई सही दर्ज़ नहीं की है और उन्हें नोटिस जारी किये साथ ही जिन्होंने टैक्स छूट के लिए फ़र्ज़ी प्रमाण लगाए वह भी जाँच में आ गए। 
हालांकि चतुर लोग अभी भी सोच रहे हैं  कि अब वह बिना मोबाइल के रहेंगे तो सरकार क्या कर लेगी तो जान लीजिये कि यह असंभव है। मोबाइल नंबर बंद करते ही बैंक खाता बंद हो जायेगा आपके सभी पहिचान पत्र डीएक्टिवेट हो जायेंगे क्योंकि अब पहिचान के लिए लोग ओ टी पी बेस्ड ऑथेंटिकेशन करवाते हैं आप कहीं भी 20 हजार से अधिक का लेनदेन डिजिटल रूप में नहीं कर सकेंगे अगर आप नौकरी में हैं तो उससे संबंधित सभी काम रुक जायेंगे अगर आप व्यापार में हैं तो आप बिना नंबर के जी एस टी दाखिल नहीं कर पाएंगे। अब जमीन प्लाट नकद में नहीं ले सकते है। अभी जो लोग पत्नी के नाम प्लाट की रजिस्ट्री करा रहे है और उसका पहिचान पत्र और मोबाइल नंबर दे रहे हैं  पर कल जब पत्नी के नाम नोटिस आएगा कि आपने यह 50 लाख की संपत्ति कैसे खरीदी, जरा सोर्स बताइयेगा तब पत्नी बेचारी यही कहेगी मेरे हस्बैंड से ही पूंछिए।
 कई लोग कहते हैं कि हम तो सब नकद में कर लेंगे तो वह यह जान लें कि हिंदुस्तान में 80 प्रतिशत आदमी डिजिटल लेनदेन कर रहा है अगर आप उससे 50 हजार एक लाख नकद मांगेगे तो वह किसी दूसरी दुकान ओर चला जायेगा अगर आप सरकारी/प्राइवेट नौकरी में हैं तो कोई भी आपको नकद वेतन नहीं देने बाला उसके लिए आपको बैंक खाता चाहिए ही और बैंक को खाता से पहले पेन कार्ड और आधार चाहिए वह भी आपस में लिंक।
 बहुत से चतुर लोग अपनी पत्नी और बच्चों के नाम से काम धंधा रजिस्टर्ड करा देते हैं पर वह भी तो उसी सिस्टम से निगरानी में है और कल तो टैक्स डिपार्टमेंट नें उस ग्रहणी को बुलाकर पूँछ लिया कि मैडम इतना पैसा आपके खाते में कैसे आया क्या बिज़नेस है आपका तो वह केवल अपने चतुर पतिदेव को ही निहार पायेगी और हो सकता है आपकी चतुराई में आपकी पत्नी पर मुकदमा हो जाये।
कल को हो सकता है कि व्यापारी संगठित होकर विरोध शुरु कर दें पर अब कोई फायदा नहीं होने बाला। बड़ी बड़ी कंपनी ऑनलाइन मार्केट में मजबूती से पैर जमा चुकी हैं हैं, उनकी मजबूत  सप्लाई चैन है, वह एक नंबर में बिल देती हैं, होम डिलीवरी देती हैं और अपने पोर्टल पर प्रोडक्ट को चुनने का मौका देती हैं। महानगरो में 100 रूपये से ज्यादा का आर्डर  zepto 1 घंटे फ्री डिलीवर कर रहा है तो आप अपना विरोध का झुनझुना लेकर वैठे रहिये लोग ऑनलाइन मार्केट से अपनी अवश्यकताओं की पूर्ति कर लेंगे।
         कुल मिलाकर ऐसा बंद चक्रव्यूह रचा गया है जिसमें अब किसी भी तरह टैक्स चोरी कर कमाया गया दो नंबर का माल लेकर बाहर नहीं निकल सकते। बाहर आने के लिए सरकार को टैक्स देना ही होगा, आज नहीं देंगे तो कल इकट्ठा ले लिया जायेगा, ज्यादा बचेंगे तो टैक्स चोरी में कानूनी कार्यवाही झेलेंगे। वेहतर है सभी लोग टैक्स चोरी छोड़कर ईमानदारी से धंधा करना शुरु करें भविष्य में बहुत फायदे में रहेंगे और जो बदलते डिजिटल सिस्टम में अभी भी जुगाड़ की उम्मीद लगाए हैं वह एक दिन बाजार से बाहर हो जायेंगे। जो सरकारी कर्मचारी अभी भ्रष्टाचार के पैसे से अपनी पत्नी और बच्चों के नाम सम्पत्ति जोड़ रहे है वह भी भविष्य में लिखित जबाब तैयार रखें। क्योंकि भविष्य में उनकी जांचे उनके सेटिंग के अधिकारी नहीं ऐ आई करेगा फिर बहुत मुश्किल होगी मामले सेट करने में।
और जिन्हें 15 साल पहले मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया का अर्थ न समझ आया हो आज समझ जाएँ कि यह था  डिजिटल इंडिया प्लान। 

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