सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

अप्रैल, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अम्मा जी का मृत्यु उत्सव

शाम को 6 बजे अम्मा जी ने अंतिम सांस ली और घर में कोहराम सा मच गया आनन फानन सभी रिश्तेदारों को फ़ोन किये जाने लगे घर के सभी लोग दुखी कम और परेशान ज्यादा दिखाई पड़ रहे थे आखिर सभी को आने बाले 13 दिन कर्तव्य  पूरा करने के थे ।         अम्मा की उम्र करीब 70 वर्ष की थी भरा पूरा परिवार 3 लड़के 2 लड़कियां 11 नाती, नातिन 3 बहु और दो दामाद ।पिछले एक साल से अम्मा जी विस्तर पर ही थी। बड़ी बहु जो परिवार में सबसे कम पड़ी लिखी थी ,वही अम्मा जी की सेवा करती थी ,मझला लड़का बिज़नस करता था और  घर के ऊपरी भाग में ही रहता था और सप्ताह में एक दो दिन अम्मा के हाल चाल पूँछ कर अपना कर्त्तव्य पूरा कर लेता था ।छोटा लड़का शहर से बाहर नौकरी करता था और 4-5 महीने में एक आध बार ही घर आता था ।सबसे बड़ा लड़का कुछ नहीं कर सका और अपनी पैतृक खेती की देखभाल करता था दोनों लड़कियों की शादी हो चुकी थी और वे अपने परिवारों के साथ खुश थीं।     अम्मा जी ने अपने जीवन में कभी आराम नहीं किया था। अम्मा जी की जिंदगी का एक ही लक्ष्य था कि बच्चों को पढ़ा लिखाकर काबिल बना दें जिससे उनका बुढ़ापा आराम से कट जाए...