ज ब भी मैं बाज़ार जाता तो मेरी निगाह अनायास उस ऑफिस की तरफ जरूर चलि जातीं, जिसे मैंने आज तक खुला नहीं देखा था। पर आज जब मैं सुबह घर से निकला तो अजीब सा दृश्य था । ऑफिस न सिर्फ खुला था बल्कि उसमें कुछ लोग भी व्यस्त हो अपने काम में लगे हुए थे। मैं अपनी उत्सुकता रोक न सका और बाइक खड़ी करके ऑफिस में घुस गया,वहां पर कोई भी बात करने को तैयार नहीं था पर सभी परेशान से जरूर थे । मैंने एक सभ्य से दिखने वाले सज्जन से पूछा, "भाईसाहब क्या हो रहा है?" उन्होंने झल्लाकर जबाब दिया, "दिखाई नहीं देता सफाई हो रही है । " मैं चुप हो गया। कुछ पल बाद उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो प्यार से बॊले, "ऑफिस खुल रहा है । " "पर आज तक तो नहीं खुला" मैंने प्रश्न किया तो महाशय बॊले "आज तक ये समस्या भी तो नहीं आयी थी । " मैंने पूछा कैसी समस्या तो बोले "तुम नहीं समझोगे । " मैंने कहा, " समझाओगे तो जरूर समझेंगे । " वो बॊले, "रात में फैक्स आया है, कि मंत्री जी सचिव साहब के साथ निरीक्षण पर आ रहे हैं । समय बहुत कम है और सारी व्यवस्था करनी है ...
बदलते तकनीकी ज़माने में आम आदमी के लिए कई सुविधाएँ प्रदान की हैं पर आम आदमी को इनकी जानकारी ही नहीं है हम आपको उनकी जानकारी देते रहेंगे