सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दिये वाली

दिए वाली सड़क के किनारे बैठी उस 9-10साल की लड़की पर मेरी निगाह जैसे ही पडी बह जोर से बोली आइये बाबु जी दिए ले लीजिये, मोमबत्ती ले लीजिये ।पर मेरे पूरे घर में बल्ब की झालर लगती है इसलिए मैं खरीदने के मूड में नहीं था और उसकी बात को अनसुना कर जैसे ही पैर बढाया बह फिर बोली "ले लीजिये बाबू जी" अबकी बार उसके स्वर में याचना थी। पर तब तक मेरी निगाह बगल से लगी झालरो की एक बड़ी दुकान पर चली गयी मैंने दुकानदार से झालर का दाम पुछा इस से पहले बह कुछ जबाब देता पीछे से उस लड़की की आवाज फिर से आयी "ले लीजिये बाबू जी आपका कुछ नहीं बिगड़ेगा पर मेरी दीवाली मन जायेगी" इस बार उसके स्वर में हताशा और निराशा थी ।मुझे पता था की इन दियो की मुझे कोई आवस्यकता नहीं है पर उसकी बात मुझे छू गयी थी इसलिए मैंने पलट कर पूछा "कितने के है" इतनी सी बात पर उस लड़की में पता नहीं कितनी ऊर्जा आ गयी और लगा जैसे नया जीवन मिल गया हो " 10रुपये के 25 है आपको  30 दे दूँगी , थोड़े से बचे है आप  सब ले लो  ,मैं भी घर जाकर त्यौहार की तैयारी करू ," एक ही साँस में उसने अपनी बात कह डाली ।  मैं तो एक...