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मन तो है वामपंथी

 * विचारों से हम सब वामपंथी होते हैं पर माता पिता और बुजुर्ग  हमें सही रास्ते के लिए प्रेरित करते हैं*  वामपंथी विचारधारा को समाज अपने लिए उचित नहीं मानता है क्योंकि यह सामजिक मान्यताओं और व्यवस्थाओं पर प्रश्न खड़े करके लोगों को उनसे दूर ले जाती है और बंधन रहित भोग विलासी जीवन को प्रेरित करती है।  वस्तुतः मनुष्य एक प्राणी के रूप में प्राकृतिक रूप से किसी भी तरह के सामाजिक बंधनों में बंधना पसंद नहीं करता है इसलिये उसे जब भी बंधन युक्त कोई भी काम करने को कहा जाता है तो उसका मन प्राकृतिक रूप से विद्रोही हो उठता है पर माता पिता, गुरु, समाज उसे निश्चित जीवन शैली और व्यवस्थाओं में बाँधने की कोशिश में लग जाते हैं स्कूली शिक्षा, घरेलू कार्य, जीवन यापन के लिए किसी की नौकरी, बच्चों को पढ़ाने /पालने की जिम्मेदारी, बुजुर्ग माता पिता की जिम्मेदारी आदि कार्य स्वेच्छा से लेने बाले इंसान बहुत कम होते हैं पर समय के साथ मज़बूरी में उन्हें करने होते हैं लेकिन सत्य तो यही है कि बच्चे, युवा, स्त्री-पुरुष  सभी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते हुए आनंदमय जीवन जीना चाहते हैं  किसी...