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मन तो है वामपंथी

 *विचारों से हम सब वामपंथी होते हैं पर माता पिता और बुजुर्ग  हमें सही रास्ते के लिए प्रेरित करते हैं* 

वामपंथी विचारधारा को समाज अपने लिए उचित नहीं मानता है क्योंकि यह सामजिक मान्यताओं और व्यवस्थाओं पर प्रश्न खड़े करके लोगों को उनसे दूर ले जाती है और बंधन रहित भोग विलासी जीवन को प्रेरित करती है। 
वस्तुतः मनुष्य एक प्राणी के रूप में प्राकृतिक रूप से किसी भी तरह के सामाजिक बंधनों में बंधना पसंद नहीं करता है इसलिये उसे जब भी बंधन युक्त कोई भी काम करने को कहा जाता है तो उसका मन प्राकृतिक रूप से विद्रोही हो उठता है पर माता पिता, गुरु, समाज उसे निश्चित जीवन शैली और व्यवस्थाओं में बाँधने की कोशिश में लग जाते हैं स्कूली शिक्षा, घरेलू कार्य, जीवन यापन के लिए किसी की नौकरी, बच्चों को पढ़ाने /पालने की जिम्मेदारी, बुजुर्ग माता पिता की जिम्मेदारी आदि कार्य स्वेच्छा से लेने बाले इंसान बहुत कम होते हैं पर समय के साथ मज़बूरी में उन्हें करने होते हैं लेकिन सत्य तो यही है कि बच्चे, युवा, स्त्री-पुरुष  सभी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते हुए आनंदमय जीवन जीना चाहते हैं 
किसी बच्चे को अगर स्कूल जाकर पढ़ने और स्कूल न जाने का विकल्प दिया जाए तो 90 प्रतिशत बच्चे स्कूल न जाने का विकल्प ही चुनेंगे इसी तरह किसी ग्रहणी को घर के दैनिक कार्य करने और न करने का विकल्प दिया जाए तो 100 प्रतिशत ग्रहणी काम न करने का विकल्प ही चुनेंगे इसी तरह युवा भी बिना नौकरी आनंद में जीवन जीने का ही विकल्प चुनते हैं 
 पर बुजुर्ग जानते हैं कि अगर बच्चों, और  युवा को उनके मन मुताविक विकल्प चुनने की आजादी मिलेगी तो परिवार का भविष्य बिल्कुल अंधकारमय हो जायेगा बच्चों के न पढ़ने, युवाओं के मेहनत न करने का परिणाम यह होगा कि भविष्य में उनकी आर्थिक आमदनी रुक जाएगी  और अंततः भौतिक सांसधनों की कमी हो जाएगी, इसलिये बुजुर्ग लम्बे समय तक सामाजिक संघर्ष में हांसिल किये अनुभवों को अपने बच्चों को बताकर उन्हें मेहनत में लगा देना चाहते हैं 
बस्तुतः बच्चों, युवा और स्त्रियों के इस प्राकृतिक विरोध बाली मनोवृत्ती को कुछ लोग समाज को विखंडित करने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं और मौका पाते ही लोगों को भड़काकर उन्हें परिवार, समाज और व्यवस्थाओं के खिलाफ खड़ा कर देते हैं ऐसे लोग चाहते हैं कि यह वर्ग पहले अनपढ़, अशिक्षित और निकम्मा बने और बाद में मज़बूरी में उनके टुकड़ो पर पलने बाला उनका अनुगामी।
इसलिये अपने वामपंथी मन को काबू में रखिये और उसे किसी के विचारों/भोग विलास का अनुगामी बनने से बचाइये 
 

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