हर माता पिता का सपना होता है कि उसका बेटा/बेटी एक सफल इंसान बने और इसके लिए वह अपने बच्चे को श्रेष्ठ शिक्षा दिलाकर डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहते हैं। माता पिता बच्चे की शिक्षा के खर्च की पूर्ति के लिए ही दिन रात मेहनत करते हैं ताकि बच्चों की पढाई में किसी तरह का आर्थिक अवरोध न आये। इसके बाबजूद बड़ी संख्या में शिक्षित किशोर असफल होकर घरों में बैठ जाते हैं और माता पिता इस असफलता का कोई कारण नहीं खोज पाते हैं ,उनका कहना बस इतना होता है कि पढ़ने में मन नहीं लगाया इसलिए सेलेक्ट नहीं हो पाया। वास्तव में कक्षा 10 तक पढ़ाई करने वाले छात्रों को यह जानकारी ही नहीं होती है कि उन्हें पढ़कर करना क्या है? माता पिता ही अपने बच्चों को बताते हैं कि उन्हें डॉक्टर बनना है इंजीनियर, इसके बाद वह इसके लिए तैयारी शुरू कर देते हैं। ज्यादातर माता पिता उन पर इन्ही दो में से किसी एक परीक्षा में सेलेक्ट होने का दबाब जाने या अनजाने डालते हैं। कक्षा 12 के बाद की प्रतियोगी परीक्षा में कुछ प्रतिशत मेधावी सफल हो जाते हैं शेष बचे में से कुछ छात्रों के पैसे बाले अभिभा...
बदलते तकनीकी ज़माने में आम आदमी के लिए कई सुविधाएँ प्रदान की हैं पर आम आदमी को इनकी जानकारी ही नहीं है हम आपको उनकी जानकारी देते रहेंगे