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अप्रैल, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मन का कचरा साफ कीजिये

 आप अपने घर में क्या रखना पसंद करते हैं अच्छी सुन्दर उपयोगी बस्तुएँ या कबाड़? निश्चित ही आप कबाड़ को या तो फेंक देते हैं या कबाड़ी को बेंच देते हैं अब आप बताएं कि आप अपने शरीर के स्टोर (दिमाग़ ) में क्या रखना पसंद करते हैं? अच्छी यादें या  ईर्ष्या द्वेष नफ़रत घृणा निश्चित ही मानवीय स्वभाव के तहत हम उन चीज़ों और विचारों को ज्यादा याद रखते हैं जो हमें पसंद नहीं आते हैं पत्नी नें पति के लिए क्या नहीं किया यह उसे ज्यादा याद रहता है जबकि पत्नी अपना पूरा समय एक घर को घर बनाने में लगा देती है। पति नें पत्नी के लिए क्या नहीं किया यह उसे जीवन भर याद रहता है जबकि पति अपनी पूरी मेहनत घर को आर्थिक और भौतिक रूप से मजबूत करने में लगता है। माता पिता नें बच्चों को कब डांटा, कौन सी फरमाइश पूरी नहीं की कौन सी सुविधा नहीं दी यह उन्हें याद रहता हैं जबकि उन्होंने जीवन में उसे सब कुछ करके पाला पोसा होता है। समाज के लोगों के लिए भी लगभग यही मनोदशा हम सबकी है लोगों नें कब अच्छा किया आपके साथ उसकी जगह कब बुरा किया या बुरा कहा बस यही याद रख पाते हैं। धीरे धीरे हमारे मन में इतना नकारात्मक कचरा इकठ्ठा हो जाता ...

आपकी सोच का दर्पण है सोशल मीडिया

  क्या आपके मोबाइल में वहीं पोस्ट दिखती होंगी जो मेरे में दिखती हैं? बहुत समय तक मुझे लगता था कि सोशल मीडिया पर जो भी परोसा जा रहा है वह सभी को दिखता होगा😀  फिर पता चला कि फेसबुक पर आपको केवल आपके बनाये दोस्तों की पोस्ट दिखती हैं यानि जिसके जैसे दोस्त उसकी वैसी पोस्ट 😀 यानि लम्बे समय तक आपने वहीं देखा जो आपके दोस्तों नें पोस्ट किया  उसके बाद सोशल मीडिया नें इसे आपके इंटरेस्ट से कनेक्ट करने का फ़िल्टर लगा दिया यानि आप जिस वीडिओ या पोस्ट पर ज्यादा समय देते हैं सोशल मीडिया जान जाता हैं कि व्यक्ति का इंटरेस्ट इसमें है और वह उसी तरह के वीडिओ की लाइन लगा देता हैं  अब धार्मिक बालों को सोशल मीडिया पर महात्मा दिख रहे हैं और और नाचने बालों को नाच के वीडिओ, खेल बालों को खेल के विडिओ, अश्लील सोच बालों को अश्लीलता के वीडिओ, अच्छी सोच बालों को अच्छे पढ़ाई बालों को कोचिंग क्लास के वीडिओ, व्यापार बालों को व्यापार के   फिर सोशल मीडिया लोगों को विगाड़ने का जिम्मेदार कैसे? जिनकी रही भावना जैसी तीन देखी... आपको समाज में वहीं दिखता है जो आप देखना चाहता हैं वहीं मिलता हैं जो आप खोजना ...

जोखिम भरे हैं सफलता के शार्टकट

  3000 करोड़ की बायजू  कंपनी की नेट वर्थ शून्य हो गयी दुनियाँ भर में रोल मॉडल बना व्यक्ति आज असफल होकर घर बैठा है पर एक गंभीर  मुद्दा पूरे समाज को चर्चा के लिए मिल गया है और अब वह लोग भी निश्चित रूप से चिंतित होंगे जिन्होंने बायजू से प्रेरणा लेकर उस रास्ते पर चलने का निर्णय लिया था।  हमरे समाज की मनोदशा ही कुछ ऐसी हैं कि बिना कुछ जाने समझे किसी भी रोल मॉडल के कार्यों को बड़े स्तर तक कॉपी करना शुरु कर देते हैं यहाँ तक कि बेईमान और  अपराधियों तक के कार्यों को अपनाकर धन दौलत कमाने से परहेज नहीं करते। पर क्या वह लोग अपने रोल मॉडल की तरह भविष्य असफलता और दंड भुगतने को तैयार होंगे?   वास्तव में वर्तमान समाज बहुत  दूरदर्शी नहीं हैं वह तात्कालिक सफल परिणामों को बड़ी जल्दी फॉलो कर लेता है विशेषकर युवा बहुत जल्दी ही सफल लोगों को कॉपी कर लेते हैं। भारत की सबसे अधिक बौद्धिक लोग आई आई टी में अपना ग्रेजुएशन पूरा करते हैं पर पिछले एक दशक में इन युवाओं में स्टार्टअप शुरु कर अरबपति, ख़रबपति बनने का जूनून चढ़ा हैं। किसी स्टार्टअप के लिए बहुत अधिक कौशल, व्यावहारिक और सामाजिक ...

विज्ञान और अध्यात्म

  विज्ञान और अध्यात्म में बहुत गहरा सम्बन्ध है मनुष्य की समस्त जैविक शक्तियों को संचालित करने के लिए एनर्जी की जरुरत होती है जो भोजन से मिलती है और यही एनर्जी शरीर के विभिन्न अंगों के कुशल संचालन को जिम्मेदार होती है विज्ञान भी मानता है कि एनर्जी का प्रवंधन किसी भी कार्य को अद्वितीय रूप से करवाने में सक्षम है और अध्यात्म भी कहता है कि मन को एकाग्र करके शरीर के अंगों से अद्वितीय कार्य लिया जा सकता है अगर हम मन को एकाग्र करने को विज्ञान की भाषा में कहें तो यह ऊर्जा को एक विशिष्ट कार्य में प्रयोग करना ही है। शरीर स्वयं तय करता है कि किस अंग के संचालन के लिए कितनी ऊर्जा चाहिए।   वास्तव में इस श्रष्टि का आधार ऊर्जा है जो हर जीव जंतु और पदार्थ में किसी न किसी रूप में पायी जाती है यहाँ तक कि किसी पत्थर में भी उसकी स्थिति के कारण स्थितिज ऊर्जा होती है वहीं जो अनाज सूखा हमें मरा हुआ प्रतीत होता है उसकी ऊर्जा ही हमारे शरीर में जाकर हमें संचालित करती है। यही ऊर्जा जब किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ में होती है तो परमाणु विस्फोट को जन्म देती है तो क्या इस ऊर्जा के रूप या उपयोग को नियंत्रित ...