सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जनवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

धर्म का अर्थशास्त्र

 टी वी में समाचार पर देख रहा था कि कुम्भ में चाय नाश्ते की एक दुकान की बेस प्राइज 80 लाख थी एक व्यक्ति नें 93 लाख देकर उसको अपने नाम आवंटित कराया तो अब निश्चित ही वह कम से कम दोगुना तो कमायेगा।  यह धर्म का अर्थशास्त्र है जिसमें सरकार नें अपने लिए राजस्व कमाया, दुकानदार नें प्रॉफिट कमाया, लोगों नें बस्तुएँ खरीदी तो उन बस्तुओं से जुड़े लोगों को रोजगार और पैसे मिले और लोगों के मन में धर्म के प्रति आस्था का संचार भी हुआ।        लेकिन भारत में एक बड़ा बौद्धिक वर्ग धर्म के खिलाफ है, उन्हें लगता है धर्म अफीम है, नशा है और यह लोगों को बर्बाद कर देगा। उन्हें यह भी लगता है कि भोग विलास की बस्तुओं के कारोबार ही लोगों को रोजगार दे सकते हैं पर शायद उन्हें यह पता न होगा कि जम्मू कश्मीर में राजस्व का एक बड़ा हिस्सा वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा से प्राप्त होता है जम्मू कश्मीर में पूरी मुस्लिम आवादी के आय के श्रोत का बड़ा हिस्सा धार्मिक यात्राओं और श्रद्धालुओं के आने जाने रुकने और शॉपिंग से ही प्राप्त होता है अगर सरकार एक साल के लिए इन दो यात्राओं पर प्रतिवन्ध लगा दे तो इन इलाक...