यहाँ दादा दादी नाना नानी पापा मम्मी बुआ मौसी आदि रिश्ते ट्रायल पर मिलते हैं। कल रात एक पिक्चर देखी ट्रायल पीरियड। पिक्चर की कहानी में एक तलाकशुदा महिला (हीरोइन) का छोटा बच्चा है जिसे स्कूल के बच्चे परेशान करते हैं फादर्स डे पर वह फादर के बारे में नहीं बता पाता तो अपनी माँ से पिता के वारे में पूँछता है। वह अक्सर टेलीविजन पर एक कंपनी का प्रचार देखता है कि 30 दिन के ट्रायल पर कोई भी सामान ले जाओ पसंद न आये तो वापस कर दो तो वह अपनी माँ से ट्रायल पर एक पापा लाने को कहता है। उधर हीरो नौकरी की तलाश में प्लसमेन्ट एजेंसी चलाने बाले अपने चाचा के यहाँ टिका हुआ है चाचा हीरोइन के मामा के दोस्त थे तो उनके अनुरोध पर हीरो को ट्रायल बाले पापा बना देते हैं शर्त यह थी कि ऐसा काम करना है कि एक महीने में बच्चा पापा शब्द से नफरत करने लगे और फिर जिंदगी में कभी पापा को याद न करे। पर हो जाता है उल्टा। बच्चा ट्रायल पापा पर निर्भर हो जाता है और उसके बिना उसको रहना मुश्किल हो जाता है अंत मे हीरोइन भी उससे प्यार करने लगती है और फ़िल्म का सुखद अंत हो जाता है। फिल्म का यह कथानक आप...
बदलते तकनीकी ज़माने में आम आदमी के लिए कई सुविधाएँ प्रदान की हैं पर आम आदमी को इनकी जानकारी ही नहीं है हम आपको उनकी जानकारी देते रहेंगे