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ट्रायल पीरियड पर रिश्ते हायर कीजिये

 यहाँ दादा दादी नाना नानी पापा मम्मी बुआ मौसी आदि रिश्ते ट्रायल पर मिलते हैं। 

कल रात एक पिक्चर देखी ट्रायल पीरियड। पिक्चर की कहानी में एक तलाकशुदा महिला (हीरोइन) का छोटा बच्चा है जिसे स्कूल के बच्चे परेशान करते हैं फादर्स डे पर वह फादर के बारे में नहीं बता पाता तो अपनी माँ से पिता के वारे में  पूँछता है। वह अक्सर टेलीविजन पर एक कंपनी का प्रचार देखता है कि 30 दिन के ट्रायल पर कोई भी सामान ले जाओ पसंद न आये तो वापस कर दो तो वह अपनी माँ से ट्रायल पर एक पापा लाने को कहता है। उधर  हीरो नौकरी की तलाश में प्लसमेन्ट एजेंसी चलाने बाले अपने चाचा के यहाँ टिका हुआ है चाचा हीरोइन के मामा के दोस्त थे तो उनके अनुरोध पर हीरो को ट्रायल बाले पापा बना देते हैं शर्त यह थी कि ऐसा काम करना है कि एक महीने में बच्चा पापा शब्द से नफरत करने लगे और फिर जिंदगी में कभी पापा को याद न करे। पर हो जाता है उल्टा। बच्चा ट्रायल पापा पर निर्भर हो जाता है और उसके बिना उसको रहना मुश्किल हो जाता है अंत मे हीरोइन भी उससे प्यार करने लगती है और फ़िल्म का सुखद अंत हो जाता है। 
  फिल्म का यह कथानक आपको एक मनोरंजक कहानी लग सकता है पर भविष्य में यह सत्य होने की संभावनाएं दिखाती है। पुराने समय मे लैला-मजनू, हीर-रांझा टाइप के प्रेमी और प्रेमिका होते है जो मर जाते थे पर साथ नहीं छोड़ते थे 90 के दशक में परिवार के दबाब में मन मारने बाले प्रेमी प्रेमिका होने लगे सन 2000 तक तू नहीं तो और सही बाले युवा दिखने लगे और 2020 तक एक से अधिक गर्ल फ्रेंड और बॉय फ्रेंड एक साथ रखने बाला कॉन्सेप्ट चलन में आ चुका है और स्वीकार्य हो चुका है। 
 इधर एकता कपूर जी ने अपने नाटक में जबरदस्त मसाला डाला हुआ है एक पति के साथ एक प्रेमी , पति मर जाता है तो नई शादी हो जाती है फिर मरा पति जिंदा हो जाता है तो अब तीन हो जाते हैं उधर महिलाएं भी पीछे नहीं है एक ही आदमी के साथ तीन तीन महिलाएं रिलेशन में हैं।
फिर शुरू होता है डाइवोर्स और ड्रामा, एक एक पुरुष महिला इतने डाइवोर्स दे देता है कि उसे खुद याद नहीं रहता है किसको दे चुका हैं  फिर डायवोर्स बाले से दुबारा प्यार  हो जाता है तो साथ रहने लगते हैं। यह सब भविष्य में घटित होता दिखेगा क्योंकि जिस तरह यह नाटकों में परोसा जा रहा है और गृहणियां आनंदित हो रही हैं उससे लगता है कि उन्हें इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती। घर मे रह रही किशोर युवती नाटक के दृश्यों पर अपनी मम्मी के आनंद देखकर भयमुक्त हो जाती है कि भविष्य में जब ऐसा वह करेगी तो मम्मी खुश ही होंगी। पापा जी तो आदि अनादि काल से फिल्मों में दिलफेंक दिखाए जाते रहे हैं और मम्मियां उन पर शक करती हुईं तो वह अभी कोई नई उपलब्धि हाँसिल नहीं कर पाए हैं। 
 तो भविष्य में यह होगा कि एक्स बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड, छोड़े गए पति पत्नी, तलाक शुदा पति पत्नी  किसी एजेंसी पर रजिस्टर्ड होंगे और जब किसी को जरूरत होगी तो वह अपने बच्चे को परिवार की आवश्यकता समझाने और उसका भावात्मक विकास करने के लिए ट्रायल पर रिश्तों को हायर कर सकेगा। 
 वैसे वर्तमान युवक और युवतियां इसका सफल प्रयोग दादा दादी बुआ और मौसी के रूप में कर रहे हैं जब बच्चा पैदा होता है तो उसे पालने में मदद के लिए दादा दादी बुआ मौसी आदि को हायर कर लिया जाता है और जैसे ही वह स्कूल जाने लायक होता है सबसे पीछा छुड़ा लिया जाता है हो सकता है अगला चरण पति पत्नी के रिश्ते का हो। 
     एकता कपूर जी को सामाजिक अधिकार दिलवाने, रिश्तों के बंधनों से मुक्त करवाने और आजादी से जीने के नए तरीक़े विकसित करने के लिए नोबेल पुरस्कार या भारत रत्न मिलने की मांग भी दर्शक कर सकते हैं

अवनीन्द्र सिंह जादौन 

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