यह व्यंग्य केवल व्यंग्य मात्र नहीं है
निंदक नियरे रखने का चलन समाप्त हो गया है क्योंकि निंदा झेल पाने लायक लोग अब बचे ही नहीं है अब तो लोग दुनियाँ भर की समस्याओं को दिल मे लिए घूमते हैं और जब तक उन्हें दूसरे को न सुना दें तब तक उसका प्रेशर झेलना उनके लिए कठिन हो जाता है। हाई ब्लड प्रेशर और हाइपर टेंशन वास्तव में कोई बीमारी नहीं है यह तो चुगली और आलोचना न कर पाने की स्थिति में हृदय और दिमाग पर उत्पन्न दबाब मात्र है इसलिए मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि पुरुष अगर दिन भर में मात्र आधा घंटा अपने मित्रों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों और विरोधी राजनीतिक पार्टी की चुगली या आलोचना किसी से कर लें तो वह ब्लड प्रेशर की समस्या से बच सकते हैं, वहीं स्त्रियां अगर 1 घंटे अपने पति, सास, ननद और पड़ोसन की चुगली/आलोचना फोन पर अपनी माँ या किसी सहेली से कर लें तो वह ब्लड प्रेशर और हाइपर टेंशन से बच सकती हैं। वैसे भी पुरुषों को चुगली कर पाने के कम अवसर मिलते हैं इसलिए वह ब्लड प्रेशर और हायपरटेंशन से ज्यादा ग्रसित होते हैं।
आलोचना सुन पाने के लिए एक अदद श्रोता की जरूरत होती है हालांकि पुरुष इस कार्य के लिए अपनी पत्नी की मदद ले सकते हैं पर वह एक के बदले दस सुना देती है वहीं लागोटिया दोस्त भी एक के बदले के चार सुना देते हैं इसलिए इन दोनों के पास जाने का मतलब है कि अपना प्रेशर और अधिक बढ़ा लेना। इसलिए यथा संभव इनसे बचना चाहिए। हाँ में हाँ मिलने बाला अच्छा श्रोता मिलना उतना ही कठिन है जितना हिमालय पर किस जड़ी बूटी को खोजना। विकल्प के रूप में सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल हो सकता है परंतु वहाँ लाइक कमेंट न आने पर प्रेशर कम नहीं होता बल्कि तनाव भी बढ़ता है ऐसे में बिना श्रोता आपका काम नहीं हो सकता है। औरतें इस मामले में काफी खुशकिस्मत हैं और वह एक दूसरे की बात बड़ी तसल्ली से सुनती हैं और समर्थन भी देती हैं पर अक्सर दोनों को अपनी अपनी बात बताने में कई घंटे लग जाते हैं
अच्छा श्रोता ढूढ़ने के लिए आपको निवेश से पीछे नहीं हटना चाहिए अगर कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाये जो एक घंटे आपकी बातें सुनने के बाद भी कोई तर्क न करे और आपकी बातों पर सहमति जताए तो उसे नित्य प्रति पूजनीय का दर्जा देते हुए रोज चाय नाश्ता कराना चाहिए और अगर आपको कोई भी न मिले तो 100 रुपये रोज पर एक व्यक्ति नियुक्त कर लेना चाहिए जो आपकी अन्य लोगों के प्रति आलोचना को सहज रूप से सुनते हुए आपको समर्थन प्रदान करे।
मेडिकल खर्चों को कम करने में श्रोता बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं इसलिए भविष्य में यह बड़े रोजगार के मौके के रूप में विकसित हो सकता है कोई व्यक्ति अगर आज एक श्रोता ट्रेनिंग स्कूल भी खोल ले और बाद में श्रेष्ठ श्रोता उपलब्ध कराने बाली फर्म का निर्माण कर लोगों को विभिन्न प्रकार के श्रोता उपलब्ध कराकर उन्हें मेडिकल समस्याओं से मुक्त कराने में अपना योगदान दे तो हो सकता है कि श्रोता उपलब्ध करवाकर असंख्य लोगों को रोजगार और असंख्य लोगों वेहतर जिंदगी देने के लिए उसे पदम श्री मिल जाये। कुल मिलाकर अच्छा श्रोता ढूढ़ते रहें और आनंददायक जीवन जियें और अगर मिल जाये तो मुझे भी बता दें।
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