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मन न मारिये लिखते रहिए

 कई बार आपका लिखा इसलिए नहीं छपता है क्योंकि आपके पद में बजन नहीं है, मसलन आप किसी निकाय के प्रमुख नहीं है या आपके पीछे विशेषज्ञ नहीं लिखा है। शिक्षा के क्षेत्र में लिखने और छपने के लिए आपके पास किसी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य या प्रोफेसर या किसी शैक्षिक निकाय के मुखिया का पद होना बहुत महत्वपूर्ण है। इन पदों के धारण करने बाले लोगों का लिखा शिक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी होगा ऐसा समाचार पत्र, पत्रिकाएं छापने बाले प्रकाशकों का मानना है। राजनीति में लिखने के लिए आपका राजनीतिक विश्लेषक होना ही पर्याप्त नहीं है इसके लिए आपका राजनीति में कोई पद होना आवश्यक है समाचार चैनल में राजनीतिक विश्लेषक होंने के चयन के क्या मानक हैं यह तो नहीं पता पर अगर एक बार किसी चैनल पर किसी जुगाड़ से आना शुरू हो गए तो सभी चैनल आपको आमंत्रण देना शुरू कर देंगे यह तय है। कृषि क्षेत्र, व्यापार, अर्थव्यवस्था, सामाजिक सरोकारों पर विचार व्यक्त करने वाले का बजनदार होना आवश्यक होता है लगभग सभी मामलों में विचारों से बड़ा कद नजर आता है। लोग विचारों की जगह, वह विचार किसके हैं, इस पर जरूर गौर करते हैं। 

अक्सर समाचार पत्रों की संपादकीय में कई नाम बार बार रिपीट होते हैं समाचार पत्र के प्रकाशक भी उनके लिखे पर इतना भरोसा रखते हैं कि उनके आर्टिकल बिना संपादन छाप दिए जाते हैं चाहे उनमें व्याकरण और तथ्यों की भारी गलतियाँ भरी पड़ी हों। कई बार आपका लिखना इसलिए भी छपने लगता है कि आप प्रकाशक के मित्र हैं और प्रकाशक आपको उस क्षेत्र का विशेषज्ञ मान चुका है या उसे कोई और विशेषज्ञ मुफ्त में नहीं मिल पा रहा है। कई बार रुपया ले देकर छपने के चलन भी पता चलता है। अखबार या पत्रिका में छपना के आपके आपके निजी सम्बंधो, आपके पीछे लगे बजनदार पद, और छपने के प्रति आपकी लालसा के लिए किए गए समग्र प्रयासों का प्रतिफल होता है। 
भले ही आप छप न पाएं पर लिखते रहिए, हो सकता है कि छपने के प्रति गंभीर लालसा रखने वाला कोई व्यक्ति आपके छपे की यथावत कॉपी करके या आंशिक संशोधन करके अपने नाम से छपवा दे हालांकि पहले ऐसा कविताओं के मामले में होता था पर अब यह किसी भी तरह के लेखन में हो सकता है। सोशल मीडिया अब लिखने और छपने का व्यापक अवसर देता है जिससे कई बार आपका लिखा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी के दूसरे के नाम से पढ़ा और सराहा जा सकता है कई बार आपके लिखे पर हिंदी के लिए किसी को बड़ा पुरस्कार प्राप्त हो सकता है इसलिए इस मानवता पूर्ण कार्य को करते रहिए। पहले लेखक अपने लिखे को छपवाकर उसकी कटिंग को या प्रति को ले जाकर अपने दोस्तों रिश्तेदारों और बड़े प्रकाशकों को पढ़वाता था अब आप इसे सोशल मीडिया के माध्यम से कर सकते हैं वैसे भी फेसबुक एक डॉलर रोज की दर से आपके लिखे को हजारों लोगों को पढ़वाने की गारंटी देता है अगर आप कंजूस टाइप के हैं और आपकी सोशल मीडिया रीच सीमित है तो फिर आपका लिखा कोई अन्य अपने नाम से लोगों को पढ़वा सकता है। इसलिए लिखने में कंजूसी मत करिए।  आप उनके लिए लिखिए जो खुद नहीं लिख सकते इससे आपका लेखन परिष्कृत होगा। आप पैसे लेकर लिखिए क्योंकि आपका लिखा छप नहीं सकता और उनके नाम से लिखा रुक नहीं सकता इसलिए कमाई के साथ अपने विचारों को छपवाईये। कुछ भी न मिले तो आलोचना के लिए लिखिए ताकि आप लोगों की निगाह में बने रहें और राजनीतिक संभावनाएं बनी रहें। अपने नाम से लिखने में डर लगे तो फर्जी नाम से लिखिए पर अपने लेखन को जिंदा रखिये।

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