हिन्दू फायर ब्रांड नेता को उत्तर प्रदेश की कमान
योगी आदित्य नाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं जनता के मूड को भांपते हुए भाजपा ,अमित शाह और नरेन्द्र मोदी जी ने हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेता को उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी सौपीं है
जन्म और प्रारंभिक जीवन
पौड़ी जिले के पंचेर गांव में नंद सिंह बिष्ट के घर पांच जून 1972 को जन्मे बालक का नाम अजय रखा गया। 14 सितंबर 2014 को उनके जीवन में नया अध्याय जुड़ गया। महंत अवेद्यनाथ के समाधिस्थ होने के साथ ही बेशुमार लोगों और संत समाज के गणमान्य लोगों के बीच उन्होंने गोरक्षपीठाधीश्वर का दायित्व संभाल लिया। वैसे उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र जीवन से ही हो गई थी। गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल करने तक उनकी गिनती अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रखर कार्यकर्ताओं के रूप में होने लगी थी। नाम के अनुरूप बाल्यावस्था से हर काम की तेजी से अजय ने न सिर्फ अपने अजेयभाव का प्रदर्शन किया बल्कि कम उम्र में संत पंथ को अपनाकर न सिर्फ आदित्यनाथ बन गए बल्कि वोटों की शक्ल में आम लोगों का दिल जीतकर 1998 में सबसे कम उम्र सांसद बनने का गौरव भी हासिल किया इसके बाद 22 साल की उम्र में परिवार त्यागकर वह योगी स्वरूप में आ गए। 1993 से अपना केंद्र गोरखपुर बना लिया और गोरखनाथ मंदिर में निरंतर बढ़ते सेवाभाव ने उन्हें 15 फरवरी 1994 को उनको गोरक्षपीठाधीश्वर के उत्तराधिकारी की पदवी तक पहुंचा दिया।
योगी आदित्य नाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं जनता के मूड को भांपते हुए भाजपा ,अमित शाह और नरेन्द्र मोदी जी ने हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेता को उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी सौपीं है
जन्म और प्रारंभिक जीवन
पौड़ी जिले के पंचेर गांव में नंद सिंह बिष्ट के घर पांच जून 1972 को जन्मे बालक का नाम अजय रखा गया। 14 सितंबर 2014 को उनके जीवन में नया अध्याय जुड़ गया। महंत अवेद्यनाथ के समाधिस्थ होने के साथ ही बेशुमार लोगों और संत समाज के गणमान्य लोगों के बीच उन्होंने गोरक्षपीठाधीश्वर का दायित्व संभाल लिया। वैसे उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र जीवन से ही हो गई थी। गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल करने तक उनकी गिनती अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रखर कार्यकर्ताओं के रूप में होने लगी थी। नाम के अनुरूप बाल्यावस्था से हर काम की तेजी से अजय ने न सिर्फ अपने अजेयभाव का प्रदर्शन किया बल्कि कम उम्र में संत पंथ को अपनाकर न सिर्फ आदित्यनाथ बन गए बल्कि वोटों की शक्ल में आम लोगों का दिल जीतकर 1998 में सबसे कम उम्र सांसद बनने का गौरव भी हासिल किया इसके बाद 22 साल की उम्र में परिवार त्यागकर वह योगी स्वरूप में आ गए। 1993 से अपना केंद्र गोरखपुर बना लिया और गोरखनाथ मंदिर में निरंतर बढ़ते सेवाभाव ने उन्हें 15 फरवरी 1994 को उनको गोरक्षपीठाधीश्वर के उत्तराधिकारी की पदवी तक पहुंचा दिया।
राजनैतिक जीवन
भारतीय जनता पार्टी के नेता के रूप में योगी जी को 1998,1999 ,2004, 2009, और 2014 में जनता ने संसद पहुँचाया। गडवाल यूनिवर्सिटी से स्नातक महंत आदित्यनाथ प्रखर हिन्दुत्ववादी नेता हैं अपने विवादित वयानों से उन्होंने कई बार भाजपा को मुश्किल में डाल दिया था आदित्यनाथ की उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल इलाके में काफी धमक हैं जन सुलभ और सहज उपलब्धता के चलते वह जनता के वीच बहुत लोकप्रिय रहे हैं। हिन्दू वाहिनी के जरिये उन्होंने पूरे प्रदेश में हिन्दुओं को एक साथ लाने के प्रयास किये हैं।
चुनौतियाँ
एक मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने असीमित चुनौतियाँ हैं हिंदुत्व विचारधारा के फायरब्रांड नेता के आने से राम मंदिर निर्माण की मांग आन्दोलन बन सकती है वहीँ मुस्लिम समाज को भरोसे में रख पाना भी एक बड़ी चुनौती होगी। प्रदेश की कानून व्यवस्था को पटरी पर लाना और बिगड़ी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना इतना आसान नहीं होगा साथ ही अगड़ो पिछड़ों और दलितों को एक साथ लाकर अगले चुनाव में इसे वोट बैंक के रूप में बरकरार रखना भी चुनौती होगी।
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