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विज्ञान गल्प 2116


दुनियां एक नए युग में जा चुकी थी विज्ञान अपने सर्वोत्तम अविष्कारों के साथ लोगों की सेवा में लगा था मनुष्य अब मनुष्य ना होकर प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ रचना होने का सुख उठा रहा था।
   शर्मा वर्मा का समय तो कब का ख़त्म हो चुका था अब तो आई डी का समय था लोग अब आई डी के नाम से जाने जाते थे। मेरी आई डी abcd1978kpcd थी सभी मनुष्यों के शरीर में इलेक्ट्रॉनिक चिप फिट हो चुकी थी।मनुष्य के सारे काम अब उसकी आई डी से ही होते थे। जगह जगह मशीन लगायी जा चुकी थी हर जगह प्रवेश पर चिप स्कैन होती और लोगों का काम हो जाता । लेनदेन भी अब पैसों से नहीं होता था चिप में लोगों का किया काम क्रेडिट कर दिया जाता और लोग पेमेंट के बदले चिप स्कैन करा देते। कुल मिलाकर लोग अब बहुत आरामदायक जिंदगी जी रहे थे और जिंदगी बड़ी आरामदायक थी।
    घरों में अब कोई काम नहीं बचा था। सबके घर इलेक्ट्रॉनिक हो चुके थे।दरबाजा आँख के इशारे पर खुलते और बंद होते थे। कमरे में घुसते ही लाइट अपने आप जल जाती , पंखे कूलर और ए सी अपने आप चलने लगते। मन में सोचने मात्र से मनचाहा गाना बजने लगता। मन में विचार आते ही दीवार पर टीवी आ जाती और मन में कल्पना किये कार्यक्रम को दिखाने लगते। बेड में मसाज सिस्टम लगा रहता ।बेड पर लेटते ही सिस्टम फुल चेकअप कर डिटेल नोट कर कर लेते। घर के सारे काम अब रोबोट करता था।उसमे सब कुछ फीड रहता इसलिए उसे कभी कोई निर्देश नहीं देना पड़ता। शरीर का सिस्टम रोबोट के दिमाग से जुड़ा था इसलिए रोबोट केवल इच्छा मात्र से ही सब काम कर देता।
   खाना बनाने का चलन अब खत्म हो चुका था लोग सुबह ही खाने के कैप्सूल और पेस्ट नाश्ते में ले लेते तो  दिन भर की कैलोरी रिचार्ज हो जाती। शरीर में जब एनर्जी की कमी होती तब सिस्टम आगाह कर देता और ऑफिस का रोबोट कैप्सूल दे जाता। गाड़ियां भी ड्राईवर मुक्त हो चुकी थी ,केवल जगह का नाम सोचने से ही गाड़ी वहां को चल पड़ती और गंतव्य पर जाकर रुक जाती।
         शादी करना अब चलन में नहीं था इसलिए लोग अब शादी नहीं करते थे, जब जिसका मन जिसके साथ लगता वह उसके साथ रहने लगता। बच्चे पैदा करने का चलन भी नहीं था ज्यादातर लोग युवाअवस्था में अपने स्पर्म और ओवम बैंक में जमा करते और कैरियर के ढलान पर डॉक्टर के यहाँ से एक मेडिकेटेड बेबी ले आता। बच्चे में क्या क्या चाहिए उसके लिए भी वैज्ञानिक पहले ही फॉर्म भरवा लेते और डीएनए में संशोधन कर मनचाही आकर रंग रूप और गुण की संतान का निर्माण लैब में कर देते।
  बच्चों के स्कूल में अध्यापक नहीं होते है। बच्चों के प्रवेश के समय ही उन्हें क्या बनाना है उसका कार्यक्रम दिमाग में असेम्बल कर दिया जाता स्कूल में रोबोट और कंप्यूटर के सहारे पढ़ाई होती और 20 साल में मनचाही दक्षता का पुत्र तैयार हो जाता।
   लोग अब अनाज पैदा नहीं करते है वैज्ञानिक बायु से  सीधे आवश्यक पोषक तत्व मशीनों से अवशोषित करके भोजन के कैप्सूल और टेबलेट का निर्माण करने में सक्षम हो चुके थे। पौधे केवल जीवनदायी ऑक्सीजन के लिए ही उगाये जाते और प्रत्येक पौधे को कांच के एक खोल में कैद किया जाता मशीन की सहायता से कार्बन डाई ऑक्साइड को पौधे तक पहुँचाया जाता और उससे मुक्त ऑक्सीजन को सीधे सिलेंडर में भर लिया जाता। प्रत्येक घर की छत पर घर के आवश्यकता के हिसाब से पौधे लगाकर ऑक्सीजन का उत्पादन किया जाता। जिन लोगों के पास घर और पौधे नहीं होते उन्हें ऑक्सीजन खरीदना पड़ता।
   इतना सब होने के बाद भी पानी की समस्या बहुत विकराल थी। पिछले दो दशक में कई विश्व युद्ध और गृह युद्ध केवल नदियों पर कब्जे को लेकर हुए थे। भारत में भी पानी के बटवारे को लेकर कई राज्य अलग हो चुके थे और नदियां राज्यों की सीमा में कैद हो चुकी थीं। प्रत्येक व्यक्ति को सरकार द्वारा निर्धारित पानी का उपभोग करने का अधिकार था और उसके शरीर में लगी चिप इसकी सूचना प्रतिदिन सरकारी कंप्यूटर को उपलब्ध कराती। ज्यादा पानी के उपभोग पर जेल का प्राविधान था। चीन ने बादलों को कब्ज़ा कर अपने यहाँ पानी बरसाने की तकनीक का आविष्कार कर लिया था इसलिए बायुसेना को अपनी सीमा के बादलों की सख्त पहरेदारी करनी पड़ती थी। सामान्य अपराध लगभग ना के बराबर थे पर पानी की डकैती आम बात थी इसलिए पानी हमेशा विशेष सेना की निगरानी में ही ले जाया जाता। पानी रखने स्टोर करने और वेचने का अधिकार केवल सरकार को था।
    हालाँकि सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था पर प्रमुख समस्या बिजली की निर्वाध आपूर्ति भी थी हवा पानी पर कब्ज़ा और प्राकृतिक संसाधनों के ख़त्म होने से बिजली उत्पादन केवल सौर्य ऊर्जा और परमॉणु ऊर्जा से ही होता था व्यक्ति और सिस्टम को सही तरह से काम करने के लिए 24*7 बिजली सप्लाई की जरुरत होती थी इसलिये बिजली सयन्त्रों को आतंकवादी हमलों से बचाकर रखा जाता था।
    संवेदना हीन वातावरण में पिछले 100 वर्षो में मनुष्य ने सब कुछ हांसिल कर लिया था उसने भूख प्यास पर विजय प्राप्त कर ली थी पर ना तो वह जल बना सका और ना ही हवा। फिर भी विज्ञान की अभिनव विजय यात्रा अभी भी जारी है और भविष्य में वह किन किन चीजों पर विजय प्राप्त करता है यह देखना भी रुचिकर होगा।
    

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