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मुफ्तखोरी की आदत

हमारा देश मुफ्तखोरो का देश है क्यूंकि कई सौ सालों की गुलामी के बाद मुफ्तखोरी हमें आजादी के इनाम में मिली है ।पहले हम विदेशी शासकों के रहमोकरम पर जिन्दा थे अब सरकारी योजनाओं के रहमोकरम पर अपना पेट पाल रहे है और देश की आधे से अधिक आबादी मुफ्तखोरी के आनंद में मस्त है।बच्चे के पैदा होते ही उसकी माँ को सरकारी सहायता उपलब्ध करवाकर ये बता दिया जाता है कि जीवन की हर मुश्किल में भारत सरकार उसके साथ है।बच्चा 3साल का होते ही महिला बाल विकास मंत्रालय पंजीरी खिला खिला कर बच्चे को स्वस्थ्य बनाने में अपनी जिम्मेदारी को निभाकर बच्चे के माँ बाप को फील गुड करा देता है इसके बाद बच्चे को गोद लेने की जिम्मेदारी है प्राथमिक शिक्षा विभाग की ।बिना फीस भरे मुफ्त की किताबों और स्कालरशिप तथा मध्यान्ह  भोजन के सहारे बच्चा कब कक्षा 8 पास कर जाता है ये माँ बाप को पता ही नहीं चलता है ।माध्यमिक शिक्षा विभाग भी गरीब ग्रामीण बच्चों को उपकृत कर 12वी पास कराकर अपने कर्तव्य पूरे कर देता है अब बारी आती है वेरोजगारी भत्ते की जिसके सहारे 2-3 साल और आराम से कट जाते है तथा किशोर छात्र के छोटे मोटे शौक भी पूरे हो जाते है और बदले में छात्र भी सरकार के उपकार को चुकाने के लिए उसकी जनसभाओं में जोर शोर से हिस्सा लेकर सरकार की मुफ्त बाली योजनाओं को घर घर तक पहुचाने में अपनी पूरी ताकत लगा देता है जिसके बदले नेता जी कुछ साल के लिए उस मेहनती बच्चे को अपना अमूल्य संरक्षण दे देते हैं और सरकारी परवरिश में पला बढ़ा युवा अपने को धन्य समझ अपनी युवावस्था की सारी शक्ति नेता जी की प्रतिष्ठा बढ़ाने में लगाना अपना पावन कर्त्तव्य समझता है। कुछ कम सक्रिय छात्रों के लिए भारत सरकार ने मनरेगा नाम की पेंशन योजना का अविष्कार किया है जिसमे काम तो मशीन करती है पर भुगतान मनुष्य को होता है पर इस भुगतान के बदले योजना से जुड़े सभी अधिकारियो और जनप्रतिनिधियों को 100दिन के लिए मुफ्त के सेवक मिल जाते है पर मैं ऐसी योजना को नमन करता हूँ जिस से हर हाथ शक्ति और हर हाथ तरक्की (केवल अधिकारी और जनप्रतिनिधि को) मिल जाती है और सरकार भी बधाई की पात्र है की वह 18 साल मेहनत कर ऐसे कुशल कामगारों का निर्माण करती है। फिर भी अगर कोई अपना जीवन यापन ना कर सके तो हर महीने  मुफ्त का सरकारी राशन ,इंदिरा आवास ,लोहिया आवास या महामाया आवास योजना (सरकार के अनुसार) में मुफ्त आवास और शौचालय भी देकर उसको मजबूत बनाने की कोशिश करती है और इस कवायद में कोई अगर कर्जदार हो जाए तो सरकार समय समय पर उनके क़र्ज़ माफ़ कर उनको फील गुड कराती है और अगर आप योजनाओं का उपयोग करते करते बुजुर्ग हो गए हैं तो सरकारी योजनाओं में आजीवन आस्था और निष्ठा बनाये रखने के बदले सरकारी नौकरी की तरह आपको सरकारी पेंशन भी मिलेगी ।और समय समय पर बोनस के रूप में कम्बल साडी जैसे पारितोषिक भी मुफ्त प्राप्त होंगे ।
  मेरे भाइयो जब भारत सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक पग पग पर हर तरह की सहायता उपलब्ध कराने को बचनबद्ध है(सिवाय रोजगार देने के) तो जीवन में समस्त चिन्ताओ का त्याग कर स्वयं को सरकार को समर्पित कर दो ।

टिप्पणियाँ

  1. अब अच्छे दिन आ गए हैं और मुफ्तखोरों के बुरे दिन. इसलिए चिंता मुक्त होकर ऐसे ही लिखते रहिये...

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