सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अभिभावक चाहें तो खत्म करवा सकते हैं निजी विद्यालय की मान्यता।

अभिभावक अगर चाहे तो किसी भी निजी विद्यालय को आसानी से न्यायालय में खड़ा करके उसकी मान्यता समाप्त करवा सकता है।
आपको निजी विद्यालय से जुड़े यह नियम जरूर जानने चाहिए। 
आजकल निजी विद्यालयों में फीस को लेकर काफी हलचल है। अभिभावक फीस देने को लेकर तैयार नहीं है और निजी स्कूल फीस छोड़ने को तैयार नहीं है। निजी स्कूल के तर्क जायज हैं पर कानूनन बहुत कमजोर।

1. निजी स्कूल की मान्यता सरकारी नियमावली के अधीन दी जाती है जिसमे निजी विद्यालय सरकार के दिशा निर्देशों को मानने के लिए एक सपथ पत्र प्रस्तुत करते हैं। न मानने की दशा में सरकार उनकी मान्यता को समाप्त करने का अधिकार रखती है।
2. निजी विद्यालयों की स्थापना के समय उस विद्यालय को अपनी स्थापना सुविधाएं पूर्ण कर ही आवेदन करना पड़ता है। अर्थात विद्यालय के पास भवन, लाइब्रेरी खेल का मैदान, शौचालय, प्रशिक्षित शिक्षक, लिपिक, चपरासी  आदि होने पर ही मान्यता मिलती है।
3. ज्यादातर निजी विद्यालय एक सोसाइटी बनाकर स्थापित किये जाते हैं जिसकी नियमावली में उल्लेख होता है कि वह नो प्रॉफिट और नो लोस् के आधार पर समाज के बच्चों को शिक्षा प्रदान करेंगे। इस आधार पर ही उसकी सोसाइटी के रजिस्ट्रेशन होता है। 
4. क्या विद्यालय शिक्षा अधिकार कानून के नियमों का अनुपालन कर रहे हैं क्या उन्होंने अभिभावकों को शामिल कर 15 सदस्यीय विद्यालय प्रवंध समिति का गठन किया है क्या विद्यालय प्रति माह बैठक बुलाकर लिए गए निर्णयों पर समिति में शामिल अभिभावकों के हस्ताक्षर लेता हैं।  
     अब प्रश्न यह हैं कि 
1. क्या विद्यालयों ने नवीन भवन निर्माण हेतु कोई अनुमति अभिभावकों से प्राप्त है और इस हेतु शुल्क बढ़ाने का फैसला अभिभावकों की सहमति से हुआ है। अगर नहीं , तो यह गैर कानूनी है और कोई भी निजी विद्यालय अपने भवन के विस्तार के लिए उनसे जबरन शुल्क नहीं ले सकता। 
2. क्या विद्यालयों ने प्रतिवर्ष अपने आय व्यय का व्योरा मान्यता प्रदान करने बाले विभाग को उपलब्ध कराया है और क्या यह नो प्रॉफिट और नो लॉस के कांसेप्ट को पूरा करता है अगर नहीं , तो कानूनन यह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के लिए प्रस्तुत नियमावली का उलंघन है और उसकी समिति का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।
3. क्या विद्यालय ने अतिरिक्त कक्षाओं के संचालन नवीन कक्षों के निर्माण, अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति हेतु सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति प्राप्त की है? अगर नहीं कि है तो यह करना गैर कानूनी है।
4. क्या कक्षा 1 में अभिभावकों को प्रतिवर्ष बढ़ने बाली फीस के सम्बंध में कोई लिखित जानकारी उपलब्ध कराई गई है और उस पर लिखित सहमति प्राप्त की गई है अगर नही तो विद्यालय प्रवेश के समय तय फीस पर ही बच्चों को शिक्षित करने को कानूनन बाध्य है। बढ़ी हुई फीस का फार्मूला केवल नए छात्रों पर ही लागू होगा। 
5. क्या अभिभावकों से यह सहमति ली गयी थी कि भविष्य में कक्षाओं में ac लगाए जाने पर और कार्यालयों में गैर शैक्षणिक सुविधाएं बढ़ाने पर उनका खर्चा अभिभावक से बसूला जा सकता है अगर नहीं तो अभिभावक विद्यालयों द्वारा जबरदस्ती थोपी गईं सुविधाओं का भुगतान करने को बाध्य नहीं है।
6. कक्षा 8 तक हर विद्यालय शिक्षा अधिकार कानून का पालन करने को बाध्य है क्योंकि उसने मान्यता लेते समय हलफनामा दिया है कि वह हर हाल में सरकारी आदेशों का पालन किया है। ऐसे में वह आपके छात्र को विद्यालय से नहीं निकाल सकता है। और अगर वह किसी छात्र को बिना किसी कारण से निकालता है तो वह न्यायालय में जबाबदेह होगा और इस पर उसकी मान्यता भी जा सकती है।
  अगर आप चाहे तो इन विन्दुओ पर किसी भी निजी विद्यालय को उसकी तानाशाही पर  न्यायालय में खड़ा कर सकते हैं। उन्हें इसका जबाब देना ही होगा।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आर्टिफीसियल वनाम ओरिजिनल इंटेलीजेंस

पिछले दो दशकों में ज्ञान की उपलब्धता अत्यंत सहज और सरल हो चुकी है। एक एंड्राइड फोन और एक इंटरनेट कनेक्शन से आप दुनियाँ के हर ज्ञान को एक्सेस कर सकते हैं। पहले गूगल बाबा और अब  आर्टिफिशल इंटेलीजेंस नें लोगों के हर प्रश्न का उत्तर उपलब्ध करा दिया है, अब लोगों के दिमाग़ में कोई भी प्रश्न आता है तो वह झट से गूगल कर लेते हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि तकनीकी नें समाज में ज्ञान के एकाधिकार को समाप्त कर दिया है और ज्ञान की पहुँच अब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुँच गई है, कई एक्टिविस्ट इसे एक क्रान्तिकारी परिवर्तन मानते हैं और कहते हैं कि सोशल मीडिया के आने के बाद लोग अपने अधिकारों को जानने लगे हैं और अब उन्हें मूर्ख बनाना आसान नहीं होगा, पर क्या सच में ऐसा हो रहा है?           गूगल और आर्टिफिशल एंटीलिजेंस का ज्ञान डेटा पर आधारित है और यह डेटा भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म , वेबसाइट  या विभिन्न पोर्टल पर उपलब्ध डेटा से लिया जाता है अगर यह डेटा सही होगा तो गूगल का सर्च परिणाम भी सही होगा और अगर यह डेटा कूटरचित और भ्रामक  होगा तो उत्तर भी गलत होने क...

मोबाइल है तो निगरानी में हो

दो घटनाये देखिये  इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नें ai की मदद से लाखों टैक्स चोरी करने बालों को नोटिस भेज दिया  कर्नाटक में इनकम टैक्स नें छोटे व्यापरियों को लाखों के नोटिस थमाए तो दुकानदारों क्यू आर कोड दुकान से हटाए।  ये तो एक ट्रेलर मात्र है अभी पिक्चर बाक़ी है  2007 के लगभग दलजीत चौधरी जी  इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बने थे उसी समय  नया नया मोबाइल आया था और चम्बल के डकैतो और उनके मुखबिरों के लिए अच्छी सुविधा बन गई । तत्कालीन एस टी एफ और एस ओ जी से जुड़े लोग बताते हैं कि एसएसपी साहब नें इसी टेक्नोलॉजी को डकैत विहीन इटावा के लिए हथियार बना लिया और मोबाइल तकनीक के सहारे ही सभी डकैत मुखबिरी की दम पर निपटा दिए गए।  समय बदला और मल्टीमीडिया एंड्राइड फोन आये और अम्बानी नें सस्ते रिचार्ज और इंटरनेट से लोगों की दुनियाँ बदल दी। सोशल मीडिया पर जुड़ने की ललक नें हर हाँथ में मल्टीमीडिया मोबाइल आ गया अब बारी थी सरकार द्वारा इसी तकनीक को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की।  बैंक नें अपने कस्टमर को एस एम एस सुविधा के लिए नंबर माँगा, अधिक लेनदेन के लिए पेन कार्ड बनबाने...

घास नुचवा

उस समय उनकी उम्र 59 साल की थी शरीर दुबला पतला पर गजब की फुर्ती वाला था वो जूनियर स्कूल में प्रधानाध्यापक थे और नाम था कामता प्रसाद ।मन बचन और कर्म से स्कूल को समर्पित या यूँ कहे कि स्कूल और शिक्षा उनकी आत्मा में बसती थी उनका विद्यालय सरकारी होने के बाबजूद इलाके के सबसे अच्छे स्कूल में गिना जाता था और क्यूँ ना गिना जाये सुबह से लेकर शाम तक वो अपना सारा काम जिम्मेदारी से पूरा करते थे ।बच्चो से उन्हें बहुत प्यार था इसलिए बच्चो की उपस्थिति भी शत प्रतिशत रहती थी  शिक्षा विभाग के कई बड़े अधिकारी उस स्कूल में आकर मास्टर साहब की तारीफ कर चुके थे ।मास्टर साहब अपने रिटायरमेंट के नजदीक पहुँच कर बड़ा सुकून महसूस करते थे और कहते थे कि अपना काम ईमानदारी से करो तो रात को नींद बहुत अच्छी आती है फिर अगर मैंने अच्छा किया होगा तो ऊपर वाला भी मेरे साथ अच्छा ही करेगा     सरकार शिक्षा के प्रति बहुत गंभीर थी इसलिए उसने गरीब बच्चो को अनिवार्य शिक्षा के लिए शिक्षा अधिकार अधिनियम कानून लागू कर दिया और शिक्षा विभाग के अधिकारी उस अधिनियम की शर्तो और निर्देशों का पालन करवाने के लिए लगातार विद्यालयो...